“बूढ़े शेर” की “दहाड़” के आगे आज भी हैं सब नतमस्तक

विरोधियों की तमाम कोशिशों के बावजूद हॉली लॉज में आज भी बैठकों का दौर कायम

नवनियुक्त अध्यक्ष ने सबसे पहले की “घर के बुजुर्ग” से मुलाकात
प्रदेशाध्यक्ष पद से हटने के बाद होने लगा सुक्खू का विरोध
विक्रमादित्य सिंह सहित 11 विधायकों ने दी सुक्खू को चेतावनी

देविंदर सिंह

शिमला। तमाम उतार चढ़ावों के बावजूद हिमाचल कांग्रेस में आज भी वीरभद्र सिंह की “बादशाहत” कायम है। एक बार फिर साबित हो गया कि वीरभद्र की महत्ता के सामने आज भी कोई टिक नही सकता। इस बूढ़े शेर की दहाड़ के आगे आज भी सब नतमस्तक हैं। आज भी हॉली लॉज में जरूरी बैठकों का दौर जारी है।
सोमवार को कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने “घर के बुजुर्ग” वीरभद्र सिंह से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान प्रदेश कांग्रेस के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
इस मुलाकात के बाद एक साफ संदेश चला गया कि वीरभद्र को दरकिनार करना किसी के बस की बात नही। अगर हम वीरभद्र सिंह के पिछले राजनीतिक इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि जिसने भी वीरभद्र और कांग्रेस में दूरियां पैदा करनी चाही या वीरभद्र को दरकिनार करना चाहा तो उसे खुद ही अपनी हार का सामना करना पड़ा है।

वीरभद्र का नाम प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में भी बड़े अदब से लिया जाता है। उनका पांच दशक से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव उन्हें सभी राजनीतिज्ञों में न केवल अलग करता है बल्कि सभी की नजरों में सम्मान भी पैदा करते हैं।

कुलदीप राठौर की इस पहली मुलाकात ने भी साबित कर दिया कि अभी भी वीरभद्र का सिक्का कांग्रेस में चलता है और किसी भी चुनाव में उनके बिना कांग्रेसस की नैया पार नहीं हो सकती।

कुलदीप की मुलाकात के एक सुखद संकेत यह भी गया कि संगठन की खींचतान के कारण वीरभद्र ने जो दूरियां बना ली थी उन्हें पाटना अब दोनों तरफ से आसान होगा। इससे लोकसभा चुनावों में भी बेशक कांग्रेस को लाभ पंहुचेगा।

साथ ही साफ हो गया कि अभी तक सुक्खू की कार्यप्रणाली से नाराज़ चल रहे लोग खुलकर सामने आ गए हैं।
आज विक्रमादित्य सिंह के साथ साथ 11 विधायकों ने खुलकर वीरभद्र का समर्थन करते हुए सुक्खू को चेतावनी भी दे डाली।

सोमवार को यहां जारी संयुक्त बयान में विधायकों ने कहा कि वीरभद्र सिंह न केवल हिमाचल कांग्रेस बल्कि पूरे भारत में वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं। इन्होेंने पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक के भारत के प्रधानमंत्रियों के साथ कार्य किया है। प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री, कई बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री के रूप में सेवा कर चुके हैं। सुक्खू का बयान न केवल वीरभद्र सिंह को अपमानित करता है बल्कि कांग्रेस पार्टी और प्रदेश के लोगों को भी अपमानित करने वाला है।
उन्होंने कहा कि सुक्खू ने जो टिप्पणियां पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बारे में की हैं, वह न केवल निंदनीय ही हैं बल्कि साथ ही ये इनके प्रदेशाध्यक्ष के पद को गंवाने पर बौखलाहट है और बीमार मानसिकता को दशार्ने वाला कदम है। अच्छा होता यदि सुक्खू इस तरह की बयानबाजी न करके बीजेपी के शीर्ष नेताओं और केंद्रीय सरकार की जन विरोधी नीतियों का विरोध करते।
इन कांग्रेस के 11 विधायकों आशा कुमारी, धनीराम शांडिल, आईडी लखनपाल, नंद लाल, जगत सिंह नेगी, राजेंद्र राणा, मोहन लाल ब्राक्टा, विक्रमादित्य सिंह, विनय कुमार, आशीष बुटेल और पवन काजल के नाम शामिल है।
विधायकों ने कहा कि सुखविंद्र पिछले छह साल से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे थे। उनकी निष्क्रिय कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए और लोकसभा के चुनावों के दृष्टिगत उनकी जगह नया अध्यक्ष को बनाने का निर्णय कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने लिया।

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