राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में….हाईप्रोफाइल माना जा रहा मामला

पुलिस ने 20 दिन बाद दर्ज की एफआईआर

अभिजोत

सोलन। सोलन की एक दवा निर्माता कंपनी की जमींन की लीज डीड को जाली हस्ताक्षर व धोखे से रद्द करवाने व उसे गैर कानूनी तरीके से आगे दो लोगों के नाम ट्रांसफर करने के मामले में कई हैरतअंगेज खुलासे हुए हैं। जिसको लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है शातिरों ने फार्मा कंपनी की लीज डीड को न सिर्फ जाली हस्ताक्षर कर रद्द करवाया है, बल्कि इस जमींन को आगे दो लोगों के नाम भी ट्रांसफर कर दिया। मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं। 
इसका खुलासा एम/एस हैल्थकेयर फार्मास्युटिकल कंपनी के निदेशक छग्गन लाल ने प्रेसवार्ता के दौरान किया है।  प्रेसवार्ता में सुबाथू के निकट संचालित  कंपनी के निदेशक छग्गम लाल ने बताया कि अगस्त,2018 में उन्होंने करोड़ों रुपए का निवेश कर एम/एस हैल्थकेयर फार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटिड कंपनी को खरीदा था। यह कंपनी जिस जमींन पर निर्मित है वह 31 वर्ष के लिए लीज पर थी,जिसकी समय सीमा 2048 तक हैं,लेकिन  भूमि मालिक ने एक व्यक्ति आकाश पुत्र राजेंद्र सिंह के साथ मिलकर कंपनी की लीज डीड को रद्द करवा दिया। जबकि कंपनी से कोई भी दस्तावेज हस्ताक्षर करने के लिए उन्हें अधिकृत नहीं किया गया था। प्रेसवार्ता में कंपनी निदेशक छग्गम लाल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि भूमि मालिक व आकाश नामक  व्यक्ति ने जाली हस्ताक्षर कर कंपनी की जमींज की लीज डीड को पहले रद्द करवाया। इसके बाद जमींन मालिक ने इस जमींन को मनोज कुमार व सुमित पुत्र तीरथराम के नाम ट्रांसफर करवा दिया है।
 
उन्होंने कहा कि लीज डीड पर जाली हस्ताक्षर करने वाले आकाश पुत्र राजेंद्र सिंह को वह बिल्कुल नहीं जानते,उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की शिकायत उन्होंने 16 जनवरी,2019 को पुलिस में दी थी,लेकिन इस मामले की एफआईआर पुलिस ने करीब 20 दिन बाद की है। इससे साफ होता है कि जाली हस्ताक्षर कर भूमि की लीज डीड को रद्द करने व उसी जमींन को आगे अन्य दो लोगों के नाम ट्रांसफर करने का यह मामला हाईप्रोफाइल लोगों से जड़ा लगता है। 


 

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