सुरेश भारद्वाज के मंत्री बनते ही कांग्रेस के अजेय गढ़ में भाजपा का परचम

शिक्षा मंत्री के नेतृत्व में पहली बार मिली लोकसभा चुनावों में रोहड़ू से लीड

ठियोग व रोहड़ू में मनवाया अपने रणनीतिक कौशल का लोहा

25 सालों भाजपा रोहड़ू में नहीं कर पाई..भारद्वाज ने कर दिखाया एक साल में

अप्पर शिमला के लिए एक बड़े नेता के तौर पर उभरकर आए भारद्वाज

देविंद्र सिंह

शिमला। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के मंत्री बनते ही कांग्रेस के अजेय गढ़ रहे रोहड़ू में भी भाजपा का परचम लहरा रहा है। जहां कभी भाजपा बूथों पर अपने एंजेट तक नहीं ढूंढ पाती थी, आज उसी रोहड़ू में धीरे-धीरे बढ़त बनाते हुए भाजपा ने अपने जीत का खाता इस लोकसभा चुनावों से खोल दिया है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के मंत्री बनते ही रोहड़ू में सारे समीकरण उनके पक्ष में नजर आ रहे हैं। गुटो में बंटी भाजपा अब एकजुट है।

इन लोकसभा चुनावों में राजनीति के इस चाणक्य की भूमिका काफी अहम रही और इसी का परिणाम है कि शिक्षा मंत्री के नेतृत्व में पहली बार लोकसभा चुनावों में भाजपा को लीड मिली है। यहां तक कि स्थानीय कांग्रेस विधायक मोहन लाल के अपने बूथ में भी भाजपा को बढ़त मिली। यहां पूर्व में पंचायत प्रधान रहे नटवर भाउटा ने भाजपा की जीत के लिए दिन-रात काम किया।

पिछले 25 सालों से जो भाजपा रोहड़ू में नहीं कर पाई, उसे सुरेश भारद्वाज ने एक साल में ही कर दिखाया। इसके पीछे उनकी दिन-रात की मेहनत शामिल है। उनकी संगठन में मजबूत पकड़ और आज तक मिली सारी जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वत निभाने के कारण ही मुख्यमंत्री ने इन्हें कांग्रेस के रोहड़ू जैसे अजेय गढ़ की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसे इन्होंने सपलतापूर्वक निभाया।
सके साथ ही सुरेश भारद्वाज को ठियोग विधानसभा से भी भाजपा को लीड दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

यहां उनके सामने कांग्रेस के साथ-साथ ही हाल के विधानसभा चुनावों में एक मजबूत वोट बैंके के साथ उभरकर आए सीपीआईएस के राकेश सिंघा की भी बड़ी चुनौती थी। ठियोग में विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद से ही संगठन तार-तार हो गया था तो वहीं चुनावों में हुए भीतरघात के कारण पूर्व विधायक राकेस सिंघा ने भी पार्टी के प्रति उदासीन रवैया अपना लिया था।

लेकिन उनकी नाराजगी को झेलते हुए भी सुरेश भारद्वाज ने उनसे मुलाकात की और राकेश वर्मा की मुलाकात मुख्यमंत्री जयराम से करवाई। इस तरह भारद्वाज ने ठियोग में संगठन को न केवल फिर सक्रिय किया बल्कि यहां अहम की लड़ाई पाल बैठे भाजपा कार्यकर्ताओं को भी एकजुट करने में कामयाबी हासिल की।

कुल मिलाकर सुरेश भारद्वाज ने रोहड़ू व ठियोग दोनों ही स्थानों पर अपने रणनीतिक कौशल का लोहा मनवाया और असंभव से लग रहे काम को संभव कर दिखाया। कुल मिलाकर आज की तारिख में अपने काम के बल पर सुरेश भारद्वाज अप्पर शिमला के एक बड़े नेता के तौर पर उभर कर सामने आ गए हैं।

कम नहीं रही है चुनौतियां भारद्वाज के सामने 

सुरेश भारद्वाज जब से राजनीति में आए उन्हें हर कदम पर मुश्किलों व चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रोहड़ू जिले से ताल्लुक रखने वाले सुरेश भारद्वाज ने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की और भाजपा में अध्यक्ष पद तक पंहुचे। सुरेश भारद्वाज सासंद भी रह चुके हैं। उनके लगातार प्रयासों का ही नतीजा है कि जिस जिले को कांग्रेस अपना मजबूत दुर्ग मानती थी, उसे भारद्वाज ने न सिर्फ ढहाया बल्कि अब कांग्रेस को आने वाले समय में यहां अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ते देखा जाए तो कोई हैरानी नहीं होगी।

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