प्रियंका शर्मा 
 शिमला —हिमाचल प्रदेश में नई शिक्षा नीति जल्द लागू होगी। नई शिक्षा नीति में राज्य सरकार ने कई बदलाव किए हैं। इस बदलाव में सबसे पहले सरकार ने सेकेंडरी और हाई को एक ही विभाग में मर्ज कर दिया है। सूत्रों की मानें,तो कक्षा नौवीं से जमा दो तक की सभी शैक्षणिक गतिविधियां उच्च शिक्षा विभाग ही करेगा। यानी की सालों से शिक्षा विभाग में चल रही यह लड़ाई कि दसवीं कक्षा प्रारंभिक शिक्षा के अंडर आती है या फिर उच्च शिक्षा के अंदर, यह सभी चिंता दूर हो जाएगी।
        सूत्रों की मानें, तो राज्य सरकार ने नई शिक्षा नीति में किए गए इस बदलाव के बारे में शिक्षा विभाग से भी सुझाव मांगे थे। इसमें नई नीति में शामिल किए गए इस नियम को शिक्षा विभाग के दोनों विभागों ने माना है। यही वजह है कि अब प्रदेश में जल्द ही नई शिक्षा नीति के तहत नौवीं और जमा दो तक की शैक्षणिक गतिविधियां चलेंगी। प्रदेश में नई शिक्षा नीति लाने के निर्देश भारत सरकार ने दिए थे। भारत सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश दिए थे कि वह शिक्षा में गुणवत्ता लाने के मकसद से शिक्षा नीति में कई नियमों को बदलें। हालांकि प्रदेश की शिक्षा नीति में और किन नियमों को शामिल किया जाना है, इसका खुलासा अभी तक प्रदेश सरकार ने नहीं किया है। हाई-सेंकेडरी को एक ही विभाग में मर्ज करने को लेकर सरकार जल्द ही अधिसूचना जारी करेगी।
     अहम यह है कि हाई और सेंकेडरी के एक ही विभाग में शामिल होने के बाद टीजीटी शिक्षकों पर भी उच्च शिक्षा विभाग ही कम रिजल्ट देने पर कार्रवाई करेगा। हाल ही में केंद्र सरकार के साथ शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज की नई शिक्षा नीति पर चर्चा हुई थी। केंद्र ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह प्रदेश में ऐसी नीति लाए, जिससे प्राइमरी और उच्च शिक्षा में सुधार हो सकें। पूर्व शिक्षा सचिव डा. अरुण शर्मा के कार्यकाल के दौरान भी एमएचआरडी ने एक पत्र हिमाचल सरकार को लिखा था।
     इस पत्र में उन्होंने लिखा था कि  नई शिक्षा नीति के अंडर सभी शिक्षा विभागों को एक ही मंत्री और एक ही अधिकारी के हाथों सौंपा जाए। एमएचआरडी ने लिखा था कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को लाने के लिए ट्रासफर पॉलिसी को लेकर भी कोई नियम बनाया जाए। प्रदेश में शिक्षकों के हो रहे तबादलों से नाखुश होकर कें्रद व प्रदेश सरकार ने ट्रासंफर पॉलिसी लाने की योजना तैयार की थी। शिक्षकों के दबाव की वजह से भी यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई।

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