जगह-जगह भंडारों का आयोजन..भक्तों ने प्रसाद व चुनरी चढ़ा खुशहाल जीवन की की कामना

प्रियंका चौहान

शिमला। अष्टमी के दिन राजधानी शिमला भक्तिमय हुआ। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। शहर के कालीबाड़ी मंदिर में भक्तों की खूब भीड़ लगी रही। भक्तों ने अपनी मनोकामना पूरी करने और सभी कष्टों से मुक्ति के लिए माता के दरबार में प्रार्थना की और प्रसाद व चुनरी चढ़ाई और अपने खुशहाल जीवन की कामना की।

इस अवसर पर मंदिर में भंडारे का आयोजन भी किया गया था। आज अष्टमी के दिन नवरात्रों के वत्र रखने वाले भक्तों ने भी मां गौरी की पूजा के साथ छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन करके अपने व्रतों का संकल्प पूरा किया।

कालीबाड़ी के पंडित रेवतीरमन चक्रवर्ती ने बताया कि अष्टमी के दिन माता का विशेष पूजन होता है। इस दिन माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है। लोग दूर दूर से यहां मां की पूजा अर्चना करने पंहुचते हैं। इनमें सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि देश के अलग अलग स्थानों से भी लोग मां के दर्शनों व पूजा के लिए आते हैं। श्रद्रा के अनुसार मां अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती है और उनके कष्टों को हरती है।

स्थानीय निवासी वरींदा सिंह ने कहा कि आज का दिम बहुत हर्ष का दिन है और इस दिन पूजा का अपना विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि आज अष्टमी और नवमी एक साथ मनाई जा रही है।

एक अन्य भक्त अंकुश ने कहा कि माता रानी का आर्शिवाद उन्हें हमेशा मिला है और इस पावन अवसर पर ने मां से कामना करते हैं कि मां अपने सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें।

कालीबाड़ी मंदिर में नवरात्रों पर विशेष तौर पर भक्तों की खूब भीड़ लगी रहती है। मंदिर के बाहर भी सजावटी सामान, फूलों और खिलानों की दुकानें सजी रहती हैं। यह दुकानें खास तौर पर केवल नवरात्रों पर ही लगती हैं।

इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। इस मंदिर की स्थापना  वर्ष 1820 के आसपास की मानी जाती है। मंदिर में शारदीय नवरात्रों में माता की मूर्ति बनाने के लिए खासतौर पर कोलकाता से कारीगर बुलाए जाते हैं साथ ही मिट्‌टी भी वहीं से लाई जाती है।

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