आबकारी नीति के तहत कोटे पर जुर्माने की अनुचित लेवी को समाप्त करे सरकार 

मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन…जल्द उठाएंगे कदम 

प्रियंका चौहान 

शिमला। आबकारी व कराधान विभाग द्वारा प्रदेश के बार लाइसेंस धारकों पर की गई भारी फीस बढ़ोतरी का विरोध तेज हो गया है। यही नहीं, बार मालिकों द्वारा उठाई जाने वाली शराब के कोटे में की गई बढ़ोतरी से भी बार मालिक नाराज हैं। इसके अलावा जुर्माने के रूप में वसूल की जाने वाली फीस में की गई भारी बढ़ोतरी का भी वे विरोध कर रहे हैं।

शिमला बार एंव रेस्तरां एसोसिएशन ने आबकारी व कराधान विभाग द्वारा की गई भारी फीस बढ़ोतरी पर गहरी नाराजगी जताई है और आरोप लगाया है कि सरकार उनके कारोबार को ठप करने पर तुली है। एसोसिएशन ने विरोध स्वरूप बार को बंद कर रखा है और उनकी सरकार से मांग है कि भारी फीस बढ़ोतरी को तर्कसंगत किया जाए। एसोसिएशन इस मामले को सीएम जयराम ठाकुर से भी उठा चुकी है, लेकिन वहां से भी सिर्फ आश्वासन मिला है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सूद ने कहा कि विभाग ने वार्षिक शुल्क में जो वृद्धि की है, वह अत्यधिक है। इस कारण बार मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना था कि विभाग ने बार में इस्तेमाल होने वाली शराब का न्यूनतम कोटा फिक्स कर दिया है। इस कारण बार मालिकों को मजबूरन तय किया गया कोटा उठाना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि इसमें कमी की जानी चाहिए और न्यूनतम कोटे की शर्त हट जानी चाहिए। उनकी मांग है कि बार मालिकों को किसी भी एल-1 इकाई से शराब खरीदने की अनुमति दी जानी चाहिए या फिर विशेष दरों को शहर के भीतर उत्पाद शुल्क आयुक्त द्वारा निर्धारित किया जाना चाहिए।
सूद ने कहा कि आबकारी नीति के तहत कोटे पर जुर्माने की अनुचित लेवी को समाप्त किया जाए। उनकी मांग है कि शिमला के माल रोड़ पर अहाताओं को अनुमति देने की नीति को बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने बार के लिए बार लाइसेंस के वार्षिक शुल्क में भारी वृद्धि की है और इसमें कमी की जानी चाहिए। उनका कहना था कि शराब की बिक्री को लेकर सरकार ने न्यूनतम कोटा फिक्स किया है और इसमें इस बार भारी बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने जितना कोटा फिक्स किया है, उतना सालभर में उठाया जाना मुमकिन नहीं है। इसलिए इसमें कमी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने न्यूनतम कोटा न उठा पाने पर विभाग के पास जमा एफडी को जब्त करने का जो प्रावधान है, वह सही नहीं है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सूद ने कहा कि नई नीति में कोटा न उठाने पर दंड को तिमाही आधार पर किया गया है और इसमें पहली बार दंड स्वरूप एक लाख रूपए जुर्माना और दो दिन बार बंद रखने का जुर्माना लगाया जा रहा है, जबकि दूसरी बार दंड की राशि को बढ़ाकर दो लाख रूपए और बार बंद रखने की अवधि चार दिन की गई है। तीसरे दंड में छह लाख रूपए जुर्माना औरछह दिन बार बंद रखने का प्रावधान है और चौथे जुर्माने में बार लाइसेंस रद्द किए जाने का प्रावधान है।  उन्होंने कहा कि नई नीति में जो प्रावधान किए गए हैं, उससे बार मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और यदि इसका समाधान न निकाला गया तो वे अपने लाइसेंस सरेंडर करने को मजबूर होंगे। इससे राज्य को जहां राजस्व का भारी नुकसान होगा, वहीं बड़ी संख्या में कर्मचारी भी बेरोजगार हो जाएंगे। ऐसे में उनकी मांग है कि बार के लिए बनाई गई नीति में बदलाव किया जाए, ताकि किसी पर इसका विपरीत असर न पड़े।

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