Thursday, August 13, 2020
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हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों में सेब के बागीचों में पनपने लगा स्कैब और पतझड़ रोग

बागवानों को सलाह, बागवानी अधिकारियों की ओर से सुझाए गए सारणी अनुसार करें दवाओं का छिड़काव

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विशेषर नेगी

रामपुर/शिमला। हिमाचल के ऊपरी क्षेत्र के सेब बहुल कई इलाकों में पतझड़ एस्कैब व अन्य कई बीमारियां पनपने लगी है। इस से बागवानों की चिंता बढ़ने लगी है। बागवानों का आरोप हैकि बागवानी विभाग के पास ऐसी बीमारियों से निपटने के लिए प्रभावशाली दवाइयां ही नही है। इस से जहाँ सेब की फसल प्रभावित हो रही है वही इन बीमारियों से फल पौधों को भी नुकसान हो रहा है। उधर विभाग के विषय विशेषज्ञ भी मान रहे हैकि ऐसी बीमारियों की सम्भावनाये बढ़ गई है।

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उन का कहना है कि जिन क्षेत्रों में स्कैब की शिकायत थी वहां पर इस बीमारी पर समय रहते काबू पा लिया गया है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी हैंकि बरसात के मौसम में मॉश्चर अधिक होने के कारण बीमारियों का अधिक खतरा रहता है। इस लिए विभाग द्वारा सुझाए सडयूल के हिसाब से दवाओं का छिड़काव करें बागीचो घास आदि काट कर साफ़ रखे। बागवानी विभाग के विषय विशेषज्ञ जे सी वर्मा ने बताया कि स्कैप की बीमारी कुछ क्षेत्रों मे थी, उसे समय रहते काबू किया गया।

लोगों को शड्यूल के हिसाब से दवाइयां मुहैया करवाई जा रही है। विभाग द्वारा सुझाए शेड्यूल के अनुसार ही बगवान कीटनाशकों का छिड़काव करें। उन्होंने कहा मौसम बरसात में बगीचों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखे। क्योकि अधिक मॉश्चर होने के कारण बरसात में बीमारियों का अधिक खतरा रहता है। बागवान सुरेंद्र कुमार ने बताया कि वर्तमान में सेब बागवानों को बागीचो में तेजी से फ़ैल रहे स्कैब की चिंता सता रही है। सेब के बगीचों में तेजी से फैल रहे स्कैब की विभाग के पास प्रभावी दवा नही है। विभाग के पास पुराने जमाने की दवाइयां है ।जबकि मार्किट में कई अच्छी और प्रभावी दवाइयां है।
बाह्ली के बागवान राजा राम देष्टा ने बताया वर्तमान में पतझड़ और स्कैब कि दवा विभाग के पास प्रभावी नही है। कई इलाकों में बागवानी विभाग के अधिकारियों के पद ही रिक्त है। न ही जागरूकता से जुडी विभागीय गतिविधियां हो रही है।

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