तीसा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया स्थापना दिवस

संघ का प्रारंभ दशहरे के ही दिन हुआ था 1925 में : बलदेव

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तीसा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया स्थापना दिवस
तीसा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया स्थापना दिवस

जावेद खान

तीसा। जिला चम्बा के तीसा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वंयसेवकों ने मंगलवार को विजयदशमी के दिन विधिवत तौर पर स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर भंजराड़ू मेला ग्राउंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समस्त छः खंडों के लगभग 270 स्वंयसेवक पूर्ण गणवेश तथा बिना गणवेश 30 अन्य स्वयंसेवको ने उपस्थित होकर पूरे बाजार की परिक्रमा कर पथ संचलन किया। स्थापना दिवस पर स्वंयसेवकों द्वारा शस्त्र पूजन भी किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हिम्मत सिंह ने की जो एक वरिष्ठ समाज सेवी है और एनएचपीसी से सेवानिवृत है। कार्यक्रम में बलदेव का उद्धबोधन रहा जो वर्तमान में संघ के ग्राम विकास प्रमुख है। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि संघ का प्रारम्भ दशहरे के दिन वर्ष 1925 में किया गया। उन्होंने कहा कि नागपुर के एक उपेक्षित से मैदान में 10-12 किशोर बालकों के साथ खेलकूद और व्यायाम करके डा. हेडगेवार  ने संघ की शुरुआत की थी।

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उन्होंने कहा कि उस समय तक संघ का कोई नाम भी नहीं रखा गया था और संघ का नाम ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ काफी बाद में वर्ष 1928 में रखा गया था। उन्होंने कहा कि डा. हेडगेवार को उनके सहयोगियों द्वारा संघ का पहला सरसंघचालक नियुक्त किया गया। बलदेव ने कहा कि मात्र 10-12 बालकों से प्रारम्भ हुआ संघ आज विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है और बीबीसी द्वारा संसार का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना गया है। इस समय भारत भर में 35 हजार से अधिक स्थानों पर संघ की दैनिक शाखायें और 10 हजार से अधिक स्थानों पर साप्ताहिक शाखाएंं लगती हैं। उन्होंने कहा कि संघ का मूल स्वरूप दैनिक शाखाओं का है, लेकिन साप्ताहिक शाखाएंं ऐसे लोगों के लिए चलायी जाती हैं, जो संघ से जुड़ना तो चाहते हैं, पर प्रतिदिन नहीं आ सकते। इसी प्रकार कहीं-कहीं मासिक एकत्रीकरण भी होते हैं।

उन्होंनेे कहा कि संघ में आने वालों को स्वयंसेवक कहा जाता है। इसका अर्थ अपनी ही प्रेरणा से समाज की निस्वार्थ सेवा करने वाला है। उन्होंने कहा कि संघ की कोई सदस्यता नहीं होती। जैसे दूसरे संगठनों में लोग वार्षिक चन्दा देकर पर्ची कटवाकर सदस्य बन जाते हैं, वैसा संघ में नहीं होता। उन्होंने कहा कि शाखा में आना ही इसकी सदस्यता है। शाखायें सबके लिए खुली हुई हैं। जो भी व्यक्ति इस देश को प्यार करता है और यहांं की संस्कृति और महापुरुषों का सम्मान करता है, वह संघ की शाखाओं में आ सकता है।

 

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