वर्मिन घोषित करने से नहीं होगा समाधान, सरकार को उठाने होंगे ठोस कदम

किसान सभा सब्जी आधारित उद्योगों को लगाने के लिए सरकार पर बनाएगी दबाव

दूध का दाम बढ़ा लेकिन कीमत अभी भी पानी से कम

प्रियंका चौहान 

शिमला। किसान संगठनों के दबाव में केन्द्र सरकार बंदरों को बार-बार वर्मिन तो घोषित कर रही है लेकिन राज्य सरकार के नकारात्मक रवैये की वजह से हर बार इस फैसले का लाभ किसानों को नहीं मिल पाता। सरकार के रुख से ऐसा लगता है कि इस बार प्रदेश सरकार समाधान के लिए तैयार नहीं है। किसान सभा मांग करती आई है कि बन्दरों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित निशानेबाज़ों के दल गठित किए जाएं और वन विभाग के विशेषज्ञों की देखरेख में और ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से कलिंग आॅपरेशन चलाया जाए लेकिन सरकार हर बार किसानों को ही बन्दरों को मारने के लिए कहती है। इस बार बन्दरों को वर्मिन घोषित करने के साथ ही सरकार किसान सभा के सुझाव के बजाए बन्दरों को मारने के की राशि को 1000 रुपये करने के बारे में विचार कर रही है। ऐसे उपयों से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। ऐसा मानना है हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डाॅ. कुलदीप सिंह तँवर का। डाॅ. तँवर ने किसान सभा की जिला कमेटी की बैठक में यह बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सही मायनों में समस्या का समाधान चाहती है तो उसे बन्दरों की नसबंदी पर पैसा बर्बाद करने के बजाए शार्प शूटर तैयार कर कलिंग आपरेशन चलाना चाहिए।

किसान सभा के जिलाध्यक्ष सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के लिए किए गए आन्दोलन के दबाव में सरकार ने दूध के दाम दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाने की घोषण तो की है लेकिन अभी भी इसका दाम एक लीटर पानी से कम है। पशुपालन में दूध के उत्पाद की जो लागत हा रही है उसकी आधी कीमत भी दूग्ध उत्पादकों को नहीं मिल पा रही। उन्होंने कहा कि किसान सभा अभी भी दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 30 रुपये प्रति लीटर करने की मांग पर कायम है और अपना आन्दोलन जारी रखेगी। सत्यवान ने कहा कि किसान सभा प्रदेश में सब्जी आधारित उद्योगों को लगाने के लिए भी मांग उठाएगी। इसके अलावा बैठक में छोटे किसानों के पास 5 बीघा तक की वन भूमि को नियमित करने के लिए जल्द नीति लाने की मांग भी उठी। सचिव देवकीदन्द ने कहा कि किसान सभा न्यायालय के उस फैसले का स्वागत करती है जिसमें किसानों के बिजली-पानी के कनेक्श काटने पर रोक लगाई गई। उन्होंने कहा कि ठोस नीति बनने तक बागवान अभी भी भय में जी रहे हैं कि कब सरकार और वन विभाग उनको बेदखल करने के लिए आरा और पुलिस फोर्स लेकर खेतों में पहुंच जाए। देवकीदन्द ने कहा कि यह असमंजस की स्थिति शीघ्र समाप्त होनी चाहिए और ठोस नीति बनाकर किसानों की भूमि को नियमित करना चाहिए। इसके अलावा बैठक में मनरेगा को सुचारू रूप से चलाने और समय पर दिहाड़ी देने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की मांग भी उठी। बैठक में जिला कमेटी के अन्य सदस्य पूर्ण चन्द, जगदीश शर्मा, प्रेम कायथ, दयाल सिंह, राकेश वर्मा, राजीव कुमार, ओम प्रकाश भारती, जगदीश, विवेक कश्यप, सुखदेव चैहान भी मौजूद रहे।

 

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