आदर्श हिमाचल ब्यूरो

 

एक नाई, एक मोची, एक झीणूं बाड़ी, एक सुनार, और
एक पीपलू लुहार था ।

गौरू, गणपत, था टोणा,सूरत  नुरदु मल  सोहन  मंगतू और मामा यही बनिया व्यापार था ।
गरी  इलेचिदाना ,मूंगफली , लड्डू, बर्फी,  जलेबी , संतरी ,टॉफी और गुड़ ही मिष्ठान आहार था ।

नाइलोन , पापलीन फूलालेंन, वाशनबीयर, कपड़ा रंगदार था ।
सुथन, जुड़की, अचकन, टाला, ढाठू, वास्कट, कोट और गाची यही फैशन आम था ।

सबके एक से घर थे जिसमें बाउड़ ,भयाल, फ़ौड़ , तोंग आलीशान आवास था । मकान थे भले ही छोटे, पर हर आदमी बङा दिलदार था ।

गोखड़ू, ब्रागर, बाउरू, नथ,  कनबाली,  फूली,  मुरकी चाक,  पच्याली, जुटी,  और गाची यही सोने-चांदी, का आभूषण भंडार था ।

कदोली, बेलरोली, जरोली और चक्कर कहीं भी रोटी खा लेते थे, हर घर मे भोजऩ तैयार था । लिंगड़े, आलू,  छतरी,  चले की भाजी मजे से खाते थे,  जिसके आगे शाही पनीर बेकार था।

भात,  दाल, खिचड़ी, घी,  मिशाला, चीने और काउनी ही जंहा खान पान था ।
वंही शाकुली, पोलडु और मशेउड़े ही सबसे बड़ा पकवान था ।

ना कोई मैगी ना पिज़्ज़ा,  
झटपट पापड़, भुजिया,आचार, या ना फिर दलिया तैयार था।

ककड़ी,  मोकड़ी, पेठा, शाश, दहीं, खाट्टा और लाफा जंहा सदाबहार था । रसोई की कुनाल या तामसू को बजा लेते, मंगशीरु का जगदीश पूरा संगीतकार था।

टूलू , टफ्लू, नाथू, बिजनू,  बेलमू,  निसरू,  और हरसुख,  घराटी सब में छुपा गायक कलाकार था। लामन,  दशी,  छोड़े,  नाटी,  जातर जंहा गीत,  था । वंही बिशु,  दखनोड़,  दियाउली ,  भोज,  शांत भुंडा और जागरा ही त्योहार था ।

छार, माटी लगा कुहूल में नहा लेते,
साबुन और स्विमिंग पूल सब बेकार था।

और फिर लुकाछिपी, गुली डंडा,  डिप्पी,  गिट्टी पिठू खेल लेते,
हमें गिट्टे खेलने का खुमार था ।

अम्मा,  आई से कहानी सुन लेते, ना टेलीविज़न और ना अखबार था। भाई-भाई को देख के सब खुश थेए सभी लोगों मे बहुत प्यार था।

बाब, लोलड बाबा,  काक,  माम,  नान, यही सूंदर संसार था । बुआ, मामी, बोरी, नानी, आई, लोलडीआई,  और दाई सभी में ममता का भंडार था ।

बाबू,,मुखिया , सूरत,  शमशेर,  पदम,  जैरी,  केसर , राजा यही विकास का आधार था ।
संतू पंडत , भोला राम, डॉ फ़ौजी,  हरि, पौदु, रमता, टशी टिन्ड्डू, लामा, दुर्गा सिंह ही जीवन ब्यवहार था ।

छोटा सा रोहड़ू मेरा, पूरा बिग बाजार था!

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