हंसराज को चुराहवासियों ने राजनीति से उठकर माना अपना नेता

यहां दो बूथों पर कांग्रेस खाता तक नहीं खोल पाई

कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरेंद्र भारद्वाज को खुद बूथ एंजेट बनकर बैठना पड़ा

आदर्श हिमाचल ब्यूरो

चंबा। जिले की सबसे दुर्गम व पिछड़ी विधानसभा चुराह ने भाजपा को लीड देने में अपने सारे रिकार्ड तोड़ डाले। यहां से मिली लीड ने वर्तमान में विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज की मंत्री पद की दावेदारी को मजबूती दे दी है। पूरे चंबा जिले से किशन कपूर को एक लाख से अधिक मतों की लीड मिली है। जिले की पांचों विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा को बढ़त मिली है। यहां चुराह ने किशन कपूर को 23,418, चंबा से 28,523, डल्हौजी से 28,422 और भटियात हलके से 29,973 मतों की लीड भाजपा प्रत्याशी को मिली है।

चुराह विधानसबा की बात करें तो यहां 2012 के विधानसबा चुनावों में भाजपा के टिकट पर पहली बार भाजपा की जीत का परचम युवा नेता हंसराज ने फहराया था। अपने तीखे व आक्रामक अंदाज और अपने विधानसभा में बहुत कम समय में किए गए अभूतपूर्व कार्यों की बदौलत हंसराज ने न केवल अपने विधानसभा क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत की बल्कि पूरे हिमाचल में भी अन्य विधायकों की तुलना में अपनी अलग पहचान बनाने में सफलता हासिल की।

यहां गौर करने वाली बात यह रही कि दूसरी बार जीत दर्ज करवा विधानसभा पंहुचे हंसराज ने दिनों दिन अपने सियासी कद में बढ़त हासिल की। इसी का परिणाम रहा कि जब चंबा जिले को सरकार में प्रतिनिधित्व देने की बात आई तो चुराह से हंसराज को हिमाचल प्रदेश विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया गया। इससे उनके अपने विधानसभा हलके के लोग इतने उत्साहित हुए कि उन्होंने सारी राजनीतिक हदें तोड़ते हुए अभी तक के सबसे लोकप्रिय नेता के तौर पर हंसराज को नई पहचान दी।

चुनाव प्रचार के वक्त आधे से अधिक लोगों ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा। हंसराज के प्रयासों की सिलसिला यहीं नहीं थमा, उन्होंने अपने प्रत्याशी को लीड देने के लिए दिन-रात काम किया और विशेष प्रचार अभियान चलाया।

हंसराज के इसी विशेष अभियान का असर यह हुआ कि जिस दिन चुनावों की मतगणना होनी थी, चुराह के कई बूथों में कांग्रेस को एंजेट तक नहीं मिल पाए। एक बूथ पर तो यहां से पूर्व विधायक रहे सुरेंद्र भारद्वाज को बतौर एंजेट बैठना पड़ा। यहां तक की चुराह के दो बूथों पर तो स्थिति यह रही कि कांग्रेस यहां अपना खाता तक नहीं खोल पाई।