पैकेजिंग प्लास्टिक का कचरा एक विकराल रूप धारण कर प्रदूषण का कारण बन रहा : राज्यपाल 

आदर्श हिमाचल ब्यूरो 

शिमला। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आज शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान से साप्ताहिक पाॅलीथीन उन्मूलन कार्यक्रम ‘पोलीथीन हटाओ-पर्यावरण बचाओ अभियान-2019’ का शुभारम्भ किया। राज्यपाल ने इस अभियान के अन्तर्गत पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में सफाई अभियान का शुभारम्भ करते हुए करीब 1200 प्रतिभागियों को शहर के 14 अलग-अलग स्थानों के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।इस अवसर पर, अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि पाॅलीथीन सौंकड़ों वर्षों तक गलता नहीं है और इससे जमीन की उर्वरा शाक्ति क्षीण हो जाती है। इसके कारण वर्षा जल जमीन के नीचे जा नहीं पाता और वनस्पति को उगने नहीं देता है। खाने की वस्तुओं के संपर्क में आने से कैंसर जैसे अनेक रोगों का यह कारण बनता है। इस प्रकार, पाॅलीथीन पर्यावरण के लिए सबसे घातक है, जिसके उन्मूलन के लिए जागृति पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पैकेजिंग प्लास्टिक का कचरा एक विकराल रूप धारण कर प्रदूषण का कारण बन रहा है, जिसके प्रबंधन के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता है।आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं और कुछ जागरूकता की कमी के कारण प्लास्टिक व पाॅलीथीन पैकेट को खुले में फैंकते हैं। यही पाॅलीथीन पर्यावरण के लिए खतरा बन जाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण हैं और ऐसे अवसरों पर हमें प्रदेश को पाॅलीथीन मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें इसके प्रबंधन के लिए ठोस पग उठाने चाहिए और एकत्रित पाॅलीथीन को सड़क निर्माण, सीमेंट उद्योग र्व इंट निर्माण जैसे कार्यों में उपयोग में लाना चाहिए। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि समर्पण से वे इस कार्य से जुड़ें और पर्यावरण को सुरक्षित करने में योगदान दें ताकि हिमाचल स्वच्छ, सुन्दर, हरित एवं प्लास्टिक मुक्त प्रदेश बन सके।इस अवसर पर, राज्यपाल ने सभी प्रतिभागियों को पाॅलीथीन उन्मूलन के लिए शपथ भी दिलाई।इससे पूर्व, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक श्री डी.सी. राणा ने राज्यपाल का स्वागत किया और सप्ताह भी चलने वाले इस अभियान की जानकारी दी।स्वच्छता प्रतिभागियों में विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी, नेहरू युवा केंद्र के स्वयंसेवी, हिमाचल प्रदेश होम गार्ड के जवान, वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम शिमला, पर्यावरण विभाग एवं पर्यावरण परिषद् तथा अन्य विभागों से आए कर्मचारियों शामिल थे।

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