क्षेत्र का यह एकमात्र देवता ……… जो नववर्ष आगमन पर मनाते है जन्मदिन

 

आदर्श हिमाचल ब्यूरो

 

रामपुर। देव भूमि कहे जाने वाले हिमाचल के पहाड़ो पर अनेको देवीय परम्पराये है। इन्ही आस्थाओ के कारण ही  हिमाचली संस्कृति की अलग पहचान है। देवी देवताओ की भागीदारी के साथ उत्सव व् अन्य सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का तो आयोजन होता है, लेकिन क्षेत्र में एक ऐसे भी देवता है जो हर वर्ष नव वर्ष के आगमन पर अपना जन्मदिन मनाते है।

शिमला जिला के रामपुर उपमंडल के तहत नरेन पंचायत के ग्राम ब्रादली के देवता चतरखंड पंचवीर का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग ब्रादली देवता के मंदिर पहुँचते है और जन्मदिन में हिस्सा लेते है। आज भी देवता चतरखंण्ड का जन्मदिन मनाने भारी संख्या में क्षेत्र व् देश प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आये लोग पहुंचे। इस दौरान लोगों ने सुखद भविष्य व् अपने बिगड़े काम बनाने एवं इच्छाएं पूर्ण करने की मन्नतें देवता से मांगी।

 मान्यता है कि देवता चतरखंड अपने जन्मदिन अवसर पर लोगों की मन्नतें पूरी करता है। खासकर नौकरी एवं न्यायालय से जुड़े मामले निवारण तथा संतान का वरदान देते है। यह भी मान्यता है कि इस देवता के जन्मदिन पर क्षेत्र से संबंधित उनके अनुयायियों के मंदिर न पहुंचने पर साल शुभ नहीं गुजरता है। इसलिए सभी क्षेत्र के ग्रामीण लोग जन्मदिन में शरीक होकर अपने सुखद साल कामना के साथ आते हैं। जन्मदिन मनाने के दौरान लोग देवता को भेट चढ़ाते है और प्रसाद लेकर अपने आप को धन्य मानते हैं। इसी कारण बाहर से आए लोग देवता के मंदिर आकर प्रसाद लेना नहीं भूलते।

वैसे भी रामपुर व आसपास के क्षेत्र में इस देवता की अलग ही पहचान है और प्रतिष्ठा भी काफी है। देवता चतरखंड अपना जन्मदिन हर वर्ष नव वर्ष के आगमन पर हिंदी माह 18 पोश ही मनाते है और समूचे रामपुर क्षेत्र में एकमात्र ऐसा देवता है जो अपना जन्मदिन लगातार मनाते है। जन्मदिन अवसर पर सबसे पहले मंदिर में वाध्ययंत्रो की धुनों में देवता की पूजा की जाती है। उसके बाद विधि- विधान से देवता को देव वाध्ययंत्रो की धुनों में ही अपने जन्म स्थान पर ले जाकर वहा नचाया जाता है। इस दौरान देवता नृत्य करते है और गुर मुंह में सुआ चुभो कर शक्ति का प्रदर्शन करता है। उसके बाद जन्मदिन बनाते ही देवता वापिस अपने मंदिर में जाते है और खूब नाच गान चलता है। इस दौरान आशीर्वाद लेने और परशाद पाने वालो की भीड़ लगी रहती है।
नरेन पंचायत प्रधान नरेश चौहान ने बताया कि देवता का जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लोग दूर.दूर से आते हैं आशीर्वाद लेकर वापिस जाते हैं। जिस स्थान पर देवता जन्म दिन मनाता है उस स्थान को हीअ देवता की उतपति स्थल माना जाता है। उसके बाद लगातार आज के दिन देवता का जन्मदिन विधि विधान से हर वर्ष मनाया जाता है। जन्मदिन अवसर पर हर आशीर्वाद लेने वालो की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। खासकर नौकरी एवं न्यायालय से संबंधित मामलों का निपटारा उनके पक्ष में होता है।

 देवता कारदार डॉ केदार ने बताया कि  उनके इलाका घोड़ी कनछिन के लिए विशेष महत्त्व रखता है। इस दिन इस देवता के क्षेत्र में आने वाले लोगों को जन्मदिन मनाने आना पड़ता है अगर लोग इस जन्मदिन में नहीं पहुंचते हैं तो उनके लिए यह साल शुभ नहीं माना जाता है। उन्होंने बताया कि इस जन्मदिन में लोगों शरीक हो कर सुखद भविष्य की मनोकामना लेकर लौटते है। प्रताप सिंह बताया कि वर्षों से यह आस्था का प्रतीक देवता चतरखंड के मंदिर प्रांगण में उनका जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस दौरान हर्षो उल्लास और उमंग के साथ यह जन्मदिन मनाया जाता है। क्योंकि इस देवता को यहां के लोग आस्था का प्रतीक मानते हैं। चाहे गर्मी हो या ठंड जन्मदिन मनाने लोग आते हैं।

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