आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला। स्थानीय अलख प्रकाश गोयल (एपीजी) शिमला विश्वविद्यालय में प्रशिक्षु वास्तुकारों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण शिविर गलोबल एवोल्यूशनरी एनर्जी डिजाईन(जीईईडी) के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसमें ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफीशेंसी (बीईई), हिमुडा तथा प्रदेश ऊर्जा विभाग इसकी सहयोगी ईकाईयां रहीं। दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में गीड से मास्टर ट्रेनर सय्यैद मोहम्मद आदिल, ईसीबीसी से मास्टर ट्रेनर जियाउर रेहमान, ईसीबीसी के प्रदेश सदस्य सैफ उद्दीन तथा अश्वनी कुमार ने करीब 30 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। इसमें एपीजी विश्वविद्यालय से वास्तुशास्त्र के एचओडी शादाब हसन ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर संयोजक सम्मिलित हुए।

प्रशिक्षिण शिविर में प्रशिक्षु वास्तुकारों को किसी भी तरह के भवन निर्माण में नशा पास करवाने लिए लगने वाले संरक्षण भवन कोड-2018 के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा प्रशिक्षु वास्तुकारों को नए बनने वाले भवनों में किस प्रकार से प्राकृतिक ऊर्जा संबर्धन का किया जाना चाहिए इस पर विस्तृत तथा आधुनिक जानकारी मुहैया करवाई गई। इस दौरान प्रशिक्षार्णियों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया।

मास्टर ट्रेनर सय्यैद मोहम्मद आदिल ने भारत सरकार द्वारा ऊर्जा वार्तालाप निर्माण कोड नियम 2018 के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में इस तरह के प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर बच्चों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि भविष्य में जब यह बच्चे सरकारी अथवा निजि वास्तुकार बनने के बाद नए बनने वाले भवनों में इस कोड का प्रयोग कर सकें।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोण् एसएन कुलकर्णी ने प्रशिक्षु वास्तुकारों को दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में साधक जानकारी मुहैया करवाने के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रबंधन वर्ग अपनी ओर से शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों को बेहतर सुविधा के साथ-साथ बेहतर शैक्षणिक माहौल भी दे रहा है।

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