सेना के 220 जवानों सहित आईटीबीपी के 30 जवान खोज रहे अपने साथियों को  

मुश्किल हालात में एक बार फिर ग्लेशियर गिरने से बाधाएं…सेना ने घटनास्थल को किया प्रतिबंधित 

कमलेश 
किन्नौर/ शिमला: बर्फ में दबे 5 जवानों को खोजने के लिए अब सेना के एवलांच एक्सपर्ट व खोजी कुत्तों की भी मदद ली जा रही है। इस के लिए जम्मू कश्मीर से सेना ने वायु मार्ग से दो टीमें हादसा स्थल पर पहुँचा दी है। लेकिन जिस ग्लेशियर में सेना के जवान दबे हैं उसी स्थान पर फिर से ग्लेशियर आया था। ऐसे में ग्लेशियर में दबे जवानों को खोजना अब और मुश्किल हो गया है । हालात को देखते हुए सेना ने ग्लेशियर एक्सपर्ट को हादसा स्थल पर पहुँचा दिया है और वे दबे जवानों को खोजने में जुट गए है। सेना के 220 जवानों सहित आईटीबीपी के 30 जवान ग्लेशियर में दबे जवानों को खोजने के लिए आज सुबह 7 बजे से ही लगे है। सेना ने ग्लेशियर स्थल पर जाने के लिए पुलिस प्रशासन समेत सभी को प्रतिबंधित कर दिया है। केवल आईटीबीपी और सेना ही रेस्क्यू में लगी है। यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी वहां जाने के लिए सेना ने मनाही की है।
उल्लेखनीय है कि 20 फरवरी को करीब 11 बजे नमज्ञा ग़ांव व शिपकिला के मध्य नमज्ञा दोगरी में ग्लेशियर गिरा था । सेना के 16 जवान और आईटीबी के करीब 10 जवान इस दौरान नमज्ञा दोगरी नाले में पेयजल लाईन को ठीक करने गए थे। इस बीच ऊपर से ग्लेशियर गिरने के कारण सेना के 7 जे के राइफलज के 6 जवान लपेटे में आ गए थे। जिन में एक जवान को तुरन्त निकाल दिया गया, लेकिन पूह चिकित्सालय पहुँचते तक उस की मौत हो गई थी।बाकी जवानों को भी खोजने के प्रयास तेज कर दिए गए थे , लेकिन लगातार बर्फबारी और बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में समस्या हो रही थी। उस के बाद रात के समय फिर से ग्लेशियर गिरा था ।  इस से दबे जवानों का पता लगाना और मुश्किल हो गया है। आज मौसम साफ होते ही रेस्क्यू ऑपरेशन तेज हो गया है। इस दौरान सेना का ग्लेशियर की बारीकी को जानने वाला विशेष दस्ता भी रेडक्यू ऑपरेशन में जुट गया है।
मसलन भारत तिब्बत सीमा शिपकिला के समीप नमज्ञा दोगरी में अब भी पहाड़ो से ग्लेशियर गिरने का खतरा बना हुआ है। मौसम साफ होते ही हिमखंड पिघल कर तेजी से खिसकने लगते है।

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