हजारों बंदरों का सफाया करके किसानों ने बचायी अपनी फसलें – राज्य कमेटी की बैठक में किया खुलासा

श्रम कानूनों में बदलावों के खिलाफ 5 सितम्बर को किसान-मजदूर करेंगे प्रदर्शन

आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला। हिमाचल किसान सभा की दो दिवसीय राज्य कमेटी की विस्तारित बैठक रविवार को संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्याध्यक्ष डा. कुलदीप सिंह तंवर ने की जिसमें अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सह सचिव डा. विजू कृष्णन ने विशेष रूप से हिस्सा लिया। बैठक में अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा तैयार समीक्षा प्रपत्र के आधार पर किसानों के मुददों पर किए गए संघर्षों एवं आन्दोलनों तथा संगठनात्मक कार्यप्रणाली का अवलोकन किया गया। बैठक का उद्घाटन करते हुए डा. विजू कृष्णन ने कहा कि पिछले पांच सालों का इतिहास देशभर में किसानों के व्यापक आन्दोलनों एवं संघर्षों के लिए याद किया जाएगा। क्योंकि देश के आजाद होने के बाद किसानों के अलग-अलग संगठनों एवं मजदूर संगठनों की पहली मर्तबा इतनी बड़ी लामबंदी हुई। भले ही इन आन्दोलनों का लाभ किसानों के पक्ष की व्यवस्था बनाने में परिवर्तित नहीं हो पाया लेकिन आज उसी सरकार के दोहराव के बाद भी पांच साल से चले आ रहे किसानों के मुदृदों पर समाधान की दिशा में कोई भी ठोस बदलाव नहीं है। किसानों की दशा में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है, रोजगार के अवसर पैदा होने के बजाय अनगिनत कारोबार और औद्योगिक इकाईयां बंद हो रही हैं जिससे मिला हुआ रोजगार भी उजड़ रहा है।

हिमाचल किसान सभा के पूर्व महासचिव एवं विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में हिमाचल प्रदेश में भी किसान-बगवानों ने जमीन से बेदखली के खिलाफ, किसानों को दूध के दाम दिलाने, सेब बागवानों से आढ़तियों द्वारा की जा रही खुली लूट को रोकने तथा सेब के लम्बित भुगतानों को दिलाने में किसान सभा ने किसान संघर्ष समिति के साथ मिलकर निर्णायक लड़ाई लड़ी। सिंघा ने रेखांकित किया कि आज के इस नवउदारवादी दौर में मुहनतकश तबकों को आर्थिक संकट से बाहर निकालने का रास्ता और ज्यादा संकटग्रस्त होता जा रहा है जिसका वर्तमान सरकारों के पास कोई ठोस समाधान नजर नहीं आता है। इसलिए राकेश सिंघा ने किसानों के साथ-साथ तमाम मेहनतकश तबकों को एकजुट होकर संगठित आन्दोलन विकसित करने की अपील की, उसी से समाधान के रास्ते निकलेंगे।

बैठक में 9 जिलों से लगभग 60 किसान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जंगली जानवरों की समस्या को लेकर किसानों ने सरकार को कोसते हुए सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया। साथ ही सिरमौर, सोलन, मण्डी, शिमला, कांगड़ा, चम्बा आदि जिलों से आए किसान प्रतिनिधियों ने रिपोर्ट किया कि बंदरों के वर्मिन घोषित होने के बाद बंदूकें व असला न होने के कारण किसानों ने चूहे मारने वाली दवाई का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में बंदरों का सफाया करके अपनी फसलों को बचाने की मुहीम खुद ही शुरू की है। किसानों ने कहा कि हजारों की संख्या में उत्पाती बंदरों को जहर देकर खत्म किया गया है लेकिन विभाग ने इसकी कोई भी सुध न लेने के कारण सरकार से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से भी वंचित कर दिया है। ऐसा करने से जहां किसान एक ओर काफी संतुष्ट हैं वहीं सरकार की कार्यप्रणाली से भी परेशान हैं जो किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। बैठक में किसानों ने सरकार द्वारा बंदरों की नसबंदी पर 30 करेाड़ से भी अधिक राशि को जनता के पैसों की बर्बादी बताया। किसानों ने सरकार व विभाग पर आरोप लगाया कि जब मारने की अनुमति दे दी है तो फिर नसबंदी क्यों? इससे अच्छा तो होता कि सरकार प्रशिक्षित शूटरों की टीमें बनाकर इस काम को अंजाम देती। और शहरों में तो कम से कम लोगों को राहत देती जहां अभी भी समस्या जस की तस बनी हुई है और प्रतिदिन दर्जनभर बंदरों के काटने की खबरें आ रही हैं।

इसी प्रकार से राज्याध्यक्ष डा. कुलदीप सिंह तंवर ने किसान सभा के नेतृत्व में लड़े गए आन्दोलनों ने किसानों के अंदर एक नए प्रकार की ऊर्जा और विश्वास पैदा कर दिया है। डा. तंवर ने हाल ही में सब्जियों में टमाटर को करेट की बनिस्बत किलो के हिसाब से खरीद, नाजायज काट बंद करने, सब्जी मंडी में व्यवस्था सुधार के लिए एपीएमसी प्रशासन और सरकार द्वारा किसानों की मांगें मानने पर किसानों की जीत करार दिया।

राज्य कमेटी की बैठक के निर्णयानुसार डा. तंवर ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए गए भारी बदलावों के खिलाफ आगामी 5 सितम्बर को पूरे देश में तथा प्रदेश में भी 25 खण्डों में किसानों एवं मजदूरों के संगठनों द्वारा व्यापक प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके साथ ही डाॅ. तंवर ने बताया कि 2019-20 में प्रदेश में 80 हजार किसानों को सदस्य बनाया जाएगा। बैठक में डाॅ. ओंकार शाद, कुशाल भारद्वाज, विश्वनाथ शर्मा, सत्यवान पुण्डीर, नारायण चैहान, रमेश वर्मा, प्रो. राजेन्द्र सिंह चैहान, देवकीनंद, सतपाल, डाॅ दत्तल, प्यारेलाल वर्मा, मोहित शर्मा, जोगिन्द्र वालिया, मुनीश कुमार, मोती राम, रामलाल, संदीप वर्मा, प्रेम चैहान, केशव वर्मा, जयशिव ठाकुर, गणेशम, सोहन ठाकुर, ओम प्रकाश भारती, दिनेश मेहता, दयाल सिंह, शिव कुमार, नरेन्द्र आदि प्रतिनिधियों ने चर्चा में भाग लिया।