छात्रों से वसूली जा रही है मनचाही फीस – अभिभावक……

किताबों , यूनिफार्म में भी लूटे जा रहे पैसे, अभिभावको में रोष व्यापत….

आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला। छात्र अभिभावक मंच ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानीए लूट खसोट व भारी फीसों के खिलाफ डीसी ऑफिस शिमला के बाहर प्रदर्शन किया गया। इसके बाद मंच का एक प्रतिनिधिमंडल मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा की अगुवाई में डीसी शिमला से मिला व उन्हें 14 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल में सह संयोजक बिंदु जोशी,एडवोकेट हरि सिंह पंवरएफालमा चौहान, बलबीर पराशर, बाबू राम,चन्द्रकान्त वर्मा, कपिल शर्मा, विनोद बिरसांटा, बालक राम, किशोरी ढटवालिया, विक्रम बग्गा, अनिल कुमार,जसबीर कौर,गुरविंद्र कुमार,लक्ष्मी भल्ला,रमेश कुमार,मनविंद्र,लोकेंद्र व गुरविंद्र कौर आदि शामिल रहे।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि आंदोलन की अगली कड़ी में 13 मार्च को उच्चतर शिक्षा निदेशक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन होगा व उन्हें ज्ञापन दिया जाएगा। भारी फीसों के खिलाफ मंच का प्रतिनिधिमंडल 16 मार्च को शिक्षा मंत्री से मिलेगा। अगर इसके बावजूद भी प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों पर नकेल न लगाई तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा।

उन्होंने प्रदेश सरकार से निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की है। मंच ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि उसकी निजी स्कूलों के प्रबंधन के साथ मिलीभगत है। इस कारण ही इन स्कूलों में प्रवेशएपाठ्यक्रम व फीस को संचालित करने के लिए कोई कड़ा कानून नहीं बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि एक तरफ छात्रों से पचास हज़ार रुपये फीस वसूली जा रही है वहीं दूसरी ओर टूअर व ट्रिप के नाम पर 35 हज़ार रुपये तक बसूले जा रहे हैं। यह छात्रों व अभिभावकों की खुली लूट है। उन्होंने मांग की है कि प्रदेश सरकार निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाए। इसके लिए सबसे पहले प्रदेश सरकार फीस का ढांचा तैयार करे।

मंच की सह संयोजक बिंदु जोशी ने कहा है कि एक तरफ भारी फीसें वसूली जा रही हैं वहीं दूसरी ओर ड्रेस व किताबों के नाम पर लूट और ज़्यादा भयानक है। स्कूलों द्वारा ड्रेस व किताबों के नाम पर प्रति छात्र प्रति वर्ष अमूमन पन्द्रह से बीस हज़ार रुपए वसूले जाते हैं। ये किताबें सीबीएसई गाइडलाइनज़ के तहत उपलब्ध करवाई जाने वाली किताबों से पांच गुणा अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं। ड्रेस भी साधारण दुकानों के मुकाबले डबल रेट पर उपलब्ध करवाई जा रही है।

हज़ारों रुपये की किताबें व ड्रेस खरीदने पर अभिभावकों को एक भी रुपया नहीं छोड़ा जाता जबकि साधारण दुकानों में एक कमीज अथवा एक किताब खरीदने पर दुकानदार ग्राहकों को छूट देते हैं। इस तरह स्कूलों द्वारा फीसोंएड्रेस व किताबों के माध्यम से भारी लूट की जा रही है परन्तु प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग मौन हैं।

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