दयाल प्यारी पर गिरी संगठन के अनुशासन की गाज, 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित

करीब तीस पंचायतों में मजबूत वर्चस्व के साथ दयाल प्यारी है अभी सब पर भारी

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6 साल के लिए पार्टी ने दयाल प्यारी को किया निष्कासित
6 साल के लिए पार्टी ने दयाल प्यारी को किया निष्कासित

वर्तमान में जिला परिषद सदस्य दयाल प्यारी कांग्रेस सरकार के वक्त थी जिला परिषद की अध्यक्ष

तीनों बार अलग-अलग वार्डों से जीत हासिल करने में रही कामयाब

आदर्श हिमाचल ब्यूरो

नाहन। प्रदेश की पच्छाद विधान सभा पर होने जा रहे उपचुनावों में सियासी रंग गहराता जा रहा है। नए घटनाक्रम में भाजपा ने कड़े तेवर दिखाते हुए दयाल प्यारी को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। उनका यह निष्कासन पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने और पार्टी नियमों के उल्लंघन करने पर किया गया है। शुक्रवार को प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने दयाल प्यारी को निष्कासित कर दिया है।

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दरअसल, भाजपा ने पच्छाद सीट से रीना कश्यप को टिकट दिया है। ऐसे में दयाल प्यारी ने बागी होते हुए नामांकन दाखिल किया और चुनाव मैदान में उतर गई। नामाकंन वापस लेने के अंतिम दिन 3 अक्तूबर को शिमला से लेकर सिरमौर तक इस मामले में खूब सियासी ड्रामा हुआ।  सीएम जयराम ठाकुर ने भी बागी दयाल प्यारी से मुलाकात कर उन्हें मनाया था और उनके चुनाव न लड़ने की खबरें भी आई थी। लेकिन वीरवार को दयाल प्यारी ने अपने समर्थकों के दबाव में अपना नामांकन वापस लेने से इंकार कर दिया। इस कारण अब पच्छाद सीट पर मुकाबला तिकोना हो गया और पार्टी ने कार्रवाई करते हुए दयाल प्यारी को निष्कासित कर दिया।

सिरमौर के पच्छाद से दयाल प्यारी तीन बार जिला परिषद के चुनाव जीती हैं। एक बार जिला परिषद की चेयरपर्सन भी रहीं। वह तीनों बार अलग-अलग वार्ड से जीती हैं। पहली बार उन्होंने बाग-पशोग से चुनाव लड़ा और जीता। इसके बाद दूसरी बार वह नारग से विजय हुईं। मौजूदा समय में बाग-पशोग से जिला परिषद की सदस्य हैं। उनकी पक़ड़ का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी, तब वह जिला परिषद की चेयरपर्सन थी। करीब तीस पंचायतों पंचायतों में उनकी मजबूत पकड़ के कारण फिलहाल उनकी स्थिति मजबूत है।

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