बोले...प्रदेश के अनुछुए पर्यटक स्थलों को विकसित कर अधिक से अधिक पर्यटकों को करेंगे आकर्षित

आदर्श हिमाचल ब्यूरो 

शिमला। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि नीति निर्माताओं व विचारकों को ऐसी नीतियां व कार्यक्रमों का सुझाव देना चाहिए जो क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत प्रासंगिक व व्यावाहरिक हों। मुख्यमंत्री आज यहां शिमला के सेंटर आफ पॉलिसी, रिसर्च एवं गवनेंर्स (सीपीआरजी) द्वारा ‘डव्लपमेंट मॉडल फॉर हिली स्टेट्स इन न्यू एमर्जिंग इण्डिया’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। सम्मेलन में प्रसिद्ध अर्थ-शास्त्री राजनीतिक, विश्लेषक व नीति निर्माता भाग ले रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाबद्ध एवं सतत विकास द्वारा ही प्रगति एवं समृद्धि के रास्ते पर अग्रसर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से न केवल लोगों की आशाओं व आकांक्षाओं के अनुसार विकास की बेहतर योजनाएं बनाने में सहायता मिलती है, बल्कि सतत विकास भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि योजनाकारों को यह सुनिश्चित बनाना चाहिए कि सार्वजनिक धन का उपयोग सही प्रकार से किया जाए ताकि लोग विकास योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठा सकें।

जय राम ठाकुर ने कहा कि यह क्षेत्रीय सम्मेलन हिमालयन क्षेत्र के विकास की रूप रेखा तैयार करने के लिए लाभदायिक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि यह एक अनूठी पहल है और अपनी तरह का ऐसा प्रयास है, जिसमें क्षेत्रीय विषमताओं व पहाड़ी क्षेत्रों की विकासात्मक उपलब्धियों पर बिस्तार से चर्चा संभव होगी तथा सम्मेलन में आने वाले सुझावों से नीतियां बनाने में सहायता मिलेगी और विकास योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त करने की मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को प्रकृति ने अपार प्राकृतिक संसधानों तथा स्वास्थ्यवर्धक जलवायु से नवाजा है जिस कारण राज्य पर्यटकों का पसंदीदा गतंव्य बना है। उन्होंने कहा कि इस क्षमता के दोहन के लिए वर्षों से कोई ठोस प्रयास नही किए गए। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित बना रही है कि प्रदेश के अनुछुए पर्यटक स्थलों को विकसित कर अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि शिमला जिला में चांशल को स्कींग गतंव्य जबकि मण्डी जिला के जंजैहली को ईको पर्यटन गतंव्य तथा कांगड़ा जिला के बीड़ बिलिंग को पैरा-ग्लाइडिंग गतंव्य के रूप में विकसित किया जा रहा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में नवेशकों को आकर्षित करने के लिए ग्लोबल इनवेस्टर मीट आयोजित करने की भी योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में बैंगलुरु और हेदरबाद में रोड शो के माध्यम से प्रदेश में निवेश की अपार क्षमता को प्रदर्शित कर निवेशकों के साथ सीधा सम्पर्क कर राज्य में निवेश के लिए आकर्षित किया गया। उन्होंने कहा कि हाल ही में राज्य में 17 हजार करोड़ की लागत से 159 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए जिससे राज्य के विकास में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ऐसे वैकल्पिक मंच तैयार करने की आवश्यकता महसूस हो रही है जहां नीति व सुशासन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा की जा सके। उन्होंने कहा कि यह समय की मांग है कि उन सभी विषयों पर विचार-विमर्श आरम्भ हो जो किन्हीं करणों से आजतक राष्ट्रीय नीतियों और प्राथमिकताओं से हमेशा वंचित रहे है।

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्ेदश्य बड़ा प्रासंगिक है क्योंकि पहाड़ी राज्यों की विकासत्मक जरूरतें अन्यों से अलग-अलग है तथा इन क्षेत्रों ज्यादा धनराशि की आवश्यकता रहती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अपने गठन के उपरांत विकास के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किया है। उन्होंने कहा कि बहुत कुछ किया जा चुका और बहुत कुछ किया जाना अभी बाकी है क्योंकि विकास एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन से नए विचार सामने आएंगे जो हिमालयाई राज्यों के विकास में सहायक सिद्ध होंगे।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन सचिव सुनील अम्बेकर ने कहा कि राष्ट्र पिछले कुछ वर्षों में सक्षम और मजबूत नेतृत्व के कारण विश्व शक्ति के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि विकास सभी राजनैतिक पार्टियों के लिए एक ऐजेंड़े के रूप में उभरा है जो कि मजबूत और जीवंत भारत के लिए एक शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में सबसे विकसित राज्य बनने का है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक, प्राकृतिक खेती तथा ईको पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं विधमान हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय और संस्थानों से स्वरोजगारोमुखी पाठ्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया ताकि युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके।

सैंटर ऑफ पॉलिसी रिसर्च एण्ड गवरनेंस के निदेशक रामानंद पाण्डे ने मुख्यमंत्री व अन्य उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस कॉन्क्लेव का लक्ष्य हिमालयन क्षेत्र के लिए एक ऐसा मंच तैयार करना है जिसमें पहाड़ी राज्य अपनी नीतियां की चर्चा कर सकें तथा एक-दूसरे के अनुभवों से सिख ले सकें।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय सचिव डॉ. राकेश ठाकुर, शिमला नगर निगम की महापौर कुसुम सदरेट, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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