पच्छाट सीट पर टिकट आवंटन को लेकर मुख्यमंत्री हो रहे सोशल मीडिया पर ट्रोल

एबीवीपी, मंडल की पंसद भी आशीष सिकटा, मंडल ने नहीं भेजा था रीना का नाम

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आशीष सिकटा
आशीष सिकटा

कल नाम वापिस लेने की अंतिम तिथि, भाजपा कर रही बागियों को बिठाने की कोशिश  

अभी दो ही सीटों पर भाजपा बेचारगी की हालत में, 68 सीटों तक बिखर न जाए कुनबा

देविंद्र सिंह

शिमला। बहुमत से जीती और अभी तक सब कुछ ठीक का अहसास करवा रही भाजपा के सामने इन उप चुनावों ने मुश्किल पैदा कर दी है। टिकट आवंटन को लेकर पच्छाद ही नहीं बल्कि धर्मशाला में भी भाजपा भारी बगावत का सामना कर रही है। दोनों सीटों पर बागियों ने पार्टी उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे रखी है। बात करें पच्छाद सीट की तो यहां टिकट आवंटन को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सोशल मीडिया पर ट्रोल भी हो रहे हैं। आशीष सिकटा और दयाल प्यारी दोनों ही नाम भाजपा के समक्ष इस समय पच्छाद की चुनावी जंग जीतने में सबसे बड़ा रोड़ा बने हुए हैं। सरकार और संगठन दोनों का अहसास है कि पच्छाद सीट पर इन दोनों को बिठाए बिना जीत का परचम लहरा पाना संभव नहीं।

उधर सूत्रों की मानें तो रीना कश्यप का नाम मंडल ने भी प्रस्तावित नहीं किया था और इसी वजह से मंडल टिकट आवंटन को लेकर नाराज था। मंडल को मनाने में भाजपा के प्रदेश प्रभारी मंगल पांडे का विशेष योगदना रहा। संगठन ने पार्टी का वास्ता देकर मंडल को फिलहाल मना तो लिया है लेकिन अंदरखाते सभी आशीष को खुला समर्थन दे रहे हैं। यह बात आशीष के नामांकन वाले दिन जुटी भारी भीड़ से भी साबित होती है। दरअसल लोकसभा चुनावों के बाद खाली हुई सीट पर मुख्यमंत्री से अप्रत्यक्ष तौर पर मिले पक्के आश्वासन के बाद ही आशीष सिकटा ने पच्छाद में जन अभि्यान चला रखा था। पिछले तीन महीनों में उन्होंने पच्छाद में अपनी पैठ बनाने में सफलता भी हासिल कर ली थी और अचानक से टिकट बदल जाने से आशीष खुद को ठगा सा महसूस करने लगे।

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वरिष्ठ नेताओं की बात न सुनने के बाद खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आशीष सिकटा को मनाने के लिए फोन किया। लेकिन खुद को छला महसूस कर रहे आशीष ने इस वक्त मुख्यमंत्री का फोन सुनने से भी गुरेज किया।  उधर, भाजपा की दूसरी सशक्त बागी उम्मीदवार दयाल प्यारी को मनाने के प्रयास भी जारी है। दयाल प्यारी का अपने क्षेत्र में अच्छा रसूख है और सीधे-सीधे 18 पंचायतों में उनकी मजबूत पकड़ है।  उल्लेखनीय है कि प्रदेश में भारी बहुमत से जीत दर्ज सत्ता में आई भाजपा में अभी दो ही सीटों के उपचुनावों में टिकटों के आवंटन को लेकर लोगों खासकर अपने ही कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गई है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो 2022 के मुख्य चुनावों तक आते आते भाजपा का कुनबा बिखर जाएगा, इसमें दो राय नहीं।

अब देखना है कि वीरवार को नाम वापिस लेने की अंतिम तारिख होने पर भाजपा अपने बागियों को बिठा पाने में किस हद तक कामयाब हो पाती है। वैसे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कह चुके हैं कि अभी महज नामांकन हुआ है, नाराज लोगों को मना लिया जाएगा और पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में उन्हें बिठा भी दिया जाएगा।

 

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