राजनीति में दोस्त-दुश्मन नहीं समय और परिस्थिति लेते हैं फैसला

पंडित सुखराम को जयराम ने करवाया चार घंटे इंतजार…पंहुची थी ठेस

सुखराम व आश्रय ने लिया है कांग्रेस का टिकट, खुद करेंगे प्रचार

न ही पार्टी और न ही बेटे का कंरूगा प्रचार

सुखराम के सभी गुण आश्रय में…..पंहुचेगा राजनीती की बुलंदियों पर

देविंद्र सिंह

शिमला। मंडी लोकसभा सीट इस वक्त हिमाचल की सबसे चर्चित सीट है। इस सीट से भाजपा मंत्री अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप शर्मा के खिलाऱ् कांग्रेस टिकट पर चुनाव मैदान में है। इस सीट की चर्चा प्रत्याशियों से ज्यादा अन्य कारणों से है। एक बडा कारण है अनिल शर्मा।

मंडी से शिमला पंहुचे अनिल शर्मा ने पार्टी और बेटे के प्रति बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस सीट पर चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि जयराम ठाकुर को एक लंबा समय राजनीत करते हुए हो गया है जबकि आश्रय न सिर्फ राजनीति में नया है बल्कि जयराम के सामने भी बच्चा है। उन दोनों में दिन और रात का फर्क है।

उन्होंने कहा कि भाजपा कैडर मजबूत है तो मुख्यमंत्री को परेशान नहीं होना चाहए र मुकाबला यहां प्रत्याशियों के बीच होना चाहिए। चुनाव जीतने से पहले राम स्वरूप शर्मा को कोई नहीं जानता था। अगर उन्हेंन पिछले पांच सालों से काम किया है तो उन्हें नहीं घबराना चाहिए।

कांग्रेस में शामिल होने की बात पर उन्होंने कहा कि मैं भाजपा का सदस्य हूं और साथ ही मंत्री भी हूं। मैंने अपनी सारी परिस्थितियों के बारे में शुरू से ही मुख्यमंत्री को अवगत करवाया है। मैं छुपकर वार नहीं करता।

कांग्रेस में जाने का फैसला पंडित सुखराम और आश्रय का था। मैं दादा-पोते के बीच फंस गया था। लेकिन पंडित सुखराम की जीत हुई और उन्होंने राहुल गांधी से मिलकर आश्रय के लिए टिकट लिया।

उन्होंने कहा कि किटरकट सुखराम आश्रय ने ली है तो प्रचार भी वहीं करेंगे और वे लोग कर भी रहे हैं। मैनें पहले ही साफ कर दिया था कि मैं न ही पार्टी और न ही बेटे के पक्ष में प्रचार करूंगा। मैं अपने घर पर ही हूं।

आश्रय के कांग्रेस में जाने को भाजपा जिम्मेदार

अनिल शर्मा ने कहा कि मैनें मजबूती से मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखा है लेकिन फिर भी पार्टी हाईकामन जो भी फैसला मुझे लेकर करेगी मुझे मंजूर है। उन्होंने कहा कि इस सब के लिए भाजजा खुद ही जिम्मेदार है। अगर समय रहते आश्रय को भाजपा में कोई जिम्मेदारी दे दी जाती तो यह दिन देखना नहीं पड़ता। लेकिन उल्टा उसे दबाने और रोकने के लिए भाजपा में काम किया गया।

बुजुर्गों का करना चाहिए आदर….जयराम के व्यवहार से सुखराम को पंहुची ठेस

अनिल शर्मा ने कहा कि बुजुर्ग नेता किसी भी पार्टी क्यों न हो सभी को आदर करना चाहिए। एक नन एक दिन हमें भी बुजुर्ग होना है। उन्होंने कहा कि मुझे जो बात खटकी वो जिस बात से पंडित सुखराम को ठेस पंहुची वो थी जब सुखराम दिल्ली में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलने गए तो उन्हें चार घंटे इतंजार करवाने के बाद भी मख्यमंत्री उनसे नहीं मिले। जबकि वीरभद्र उनसे न सिर्फ मिलते थे बल्कि उन्हें छोड़ने तक आते थे। इस बात ने पंडित सुखराम को काफी आहत किया।

सुखराम नहीं चाहते थे मैं भाजपा में आऊं…यह फैसला मेरा और बेटे का था

अनिल शर्मा ने कहा कि चुनावों से पहले पंडित सुखराम इस पक्ष में नहीं थे कि मैं भाजपा में जाऊं। यह फैसला मेरा और बेटे आश्रय शर्मा का था। अब ढलती उम्र में उन्होंने फैसला लिया कि वे वापिस कांग्रेस में ही जाएंगे।

दादा-पोते अपनी राह पर चले…अब मतदाता करेंगे फैसला

अनिल शर्मा ने कहा कि अब दाता-पोते ने अपनी राह पकड़ ली है। अब फैसला मतदाताओं के हाथ में है। मैं न तचो बेटे रौ न ही पार्टी के पक्ष में प्रचार करूंगा। मैं हर बात पर स्पष्टीकरण देना जरूरी नहीं समझता।

भाजपा टिकट देती तो श्रय निकाल सकता था सीट

अपने बेटे के लिए बोलते हुए उन्होंने कहा कि आश्रय में अपने दादा के सभी गुण है ऐर एक दिन वो राजनीति में बुलंदियों को छुएगा। अगर भाजपा उसे टिकट देती तो वो सीट निकाल सकता था। कौन बाप नहीं चाहता कि उसका बेटा सफल हो। बाप होने के नाते मेरा आर्शिवाद बेटे के साथ हमेशा है। उसमें सुखराम की झलक देखने को मिलती है।

अनिल शर्मा ने कहा राजनीति में फैसले दोस्ती-दुश्मनी के आधार पर नहीं बल्कि समय और परिस्थितियों के आधार पर लेने पड़ते हैं। भाजपा विधायक हूं इसलिए बेटे के पक्ष में नहीं बोल पा रहा हूं। परएक पिता होने के नाते सोचता हूं कि जहां तक मैं न पंहुच सका वहां तक आश्रय पंहुचे।

 

सोशल मीडिया पोस्ट पर कंरूगा कानूनी कार्यवाही

अनिल शर्मा ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया प्लेटफार्म का जबरदस्त तरीके से दुरूपयोग करते हैं।  मेरे नाम से पोस्टें डाली जा रही हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही अमल में लाउंगा। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पहले कह चुके हैं कि ये पार्टी ने नहीं डाली है। मैनें मुख्मंत्री से भी आग्रह किया है कि जो लोग परिवार में ही लड़ाई डालने में लगे हैं, ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्यवाही करें।

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