अनुशानहीनता लग रही तो करें पार्टी से निष्कासित

चुनाव लड़ना या पार्टी छोड़ने के लिए किसी के सुझावों की नहीं जरूरत

चुनावों के वक्त आए मुख्यमंत्री…कभी नहीं ली मंडी सदर की सुध..केवल अपने चुनाव क्षेत्र तक है सीमित

आदर्श हिमाचल ब्यूरो

मंडी। कैबिनेट मंत्री के पद त्यागपत्र देने के बाद अब मंडी सदर से भाजपा विधायक अनिल शर्मा खुलकर बगावत पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि अब त्यागपत्र देने के बाद मैं कहां जाऊं। घर बैठा हूं तब भी मेरे खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। पहले जब घर पर घास काट रहा था तो उस पर भी मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की और मेरा मजाक बनाया। आखिर वे क्या चाहतें है। उन्हें इतनी दिक्कत है तो मेरे घर के सामने सीआईडी लगा दें या मेरे साथ ही लगां दें कि मैं क्या करता हैं।

अनिल शर्मा ने कहा कि मैंने पहले कहा था कि मुझे मंडी से बाहर प्रचार के लिए भेजें तो भी नहीं भेजा तो अब मैं घर न बैठूं तो क्या करूं।

उन्होंने आक्रामक लहजे में कहा कि मेरे खिलाफ झूठ बोलना बंद करें। मंडी के इंचार्ज जो मुख्यमंत्री के सलाहकार भी हैं वे मेरे ही चुनाव क्षेत्र में जाकर मेरे बारे में भ्रामक बयानबाजी कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि जब प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्रीथे तो मैनें मंडी सदर में पांच हजार लोगों को नौकिरयां दिलाई और अनिव शर्मा से दो हजार लोगं की लिस्ट भी मांग थी। मैं उन्हें और मुख्यमंत्री को खुली चुनौती देता हूं कि वे अपने अपने देवी-जेवता की समय खार कहें कि उन्होंने कब अनिल शर्मा से कोई लिस्ट मांगी या ऐसी बात कही।

अनिल शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अपने चुनाव पर ध्यान दें और अगर उन्होंने कोई काम किया है तो उस पर बात करें। फालतू की बातों से लोगों को गुमराह न करें। मुख्यंमत्री को आजकल चुनावों के दौरान इस क्षेत्र की याद आई है वो भी सिर्फ वोटों के लिए। बाकी दिन वे केवल अपने चुनाव क्षेत्र तक ही सीमित रहते हैं। मंडी सदर की कोई भी सुध उन्होंने आजतक नहीं ली। यहां तक कि एक भी आदमी को यहां से नौकरी नहीं लगाया।

अनिल शर्मा ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री को लगता है कि वे अनुशासनहीनता कर रहे हैं और पार्टी के खिलाफ बोल रहे हैं तो उन्हें पार्टी से निष्कासित कर सकते हैं।

उन्होंने भाजपा विधायकों व मंत्रियों की उनके खिलाफ बयानबाजी पर कहा कि उन्हें जनता ने पूरे पांच साल तक के लिए चुनकर विधानसभा भेजा है। उन्हें चुनाव लड़ना चाहिए या पार्टी छोड़नी चाहिए इस पर वे खुद फैसला ले सकते हैं, उन्हें किसी मंत्री या विधायक की सलाह की जरूरत नहीं है। मुझे क्या करना है इसका फैसला मैं खुद करूंगा।

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