आधे कांग्रेसी आधे भाजपाई को कोई नहीं करेगा बदार्श्त

पुत्र का साथ देना हो तो अपनी मंडी सीट से नया जनादेश लेकर आएं अनिल शर्मा

त्यागनी होगी भाजपा की प्राथमिक सदस्यता के साथ साथ विधानसभा सदस्यता

नहीं तो पार्टी करेगी अनुशासानात्मक कार्रवाई 

प्रियंका चौहान

शिमला। मंत्री पद त्यागने के बाद भी अनिल शर्मा की मुश्किलें कुछ कम होती नजर नहीं आ रही है। उनके मंत्री पद के इस्तीफे के बाद अब पूरी भाजपा एक जुट होकर उनसे भाजपा सदस्यता और विधायक पद से भी इस्तीफे के मांग जोरदार तरीके से करने लगी हैं। आज शिमला में इसी विषय को लेकर भाजपा महासचिव चंद्र मोहन ठाकुर और उपाध्यक्ष गणेश दत्त ने एक संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उनसे मंडी की जनता से नया जनादेश लाने की चुनौती दी है।

चंद्र मोहन ठाकुर ने कहा कि अनिल शर्मा आधे कांग्रेसी और आधे भाजपाई बनकर रह गए हैं लेकिन न ही भाजपा और न ही कांग्रेस यह बदार्श्त करेगी। उन्होंने कहा कि आगर अनिल शर्मा अपना पिता धर्म निभाना चाहते हैं तो उन्हें भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और भाजपा के कारण मिले विधायक पद से भी इस्तीफा देना होगा। नहीं तो उन्हें मंडी सीट पर पार्टी का खुलकर साथ देना चाहिए और मंडी से पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करना चाहिए। मंडी की जनता अब परिवारवाद से उकता गई है। अगर अनिल शर्मा में थोड़ी भी नैतिकता बची है तो उन्हें विधायक पद से भी इस्तीफा देना चाहिए और मंडी की जनता से नया जनादेश लाना चाहिए।

उन्हें पता चल जाएगा कि उनकी और उनके पिता की लोकप्रियता किस स्तर तक पंहुच गई है। इस वक्त अनिल र्शमा की स्थिति ऐसी है कि ना खुदा ही मिला ना विसाले सनम न इधर के हुए न उधर के हुए हम। अनिल शर्मा अब सिर्फ रोलिंग स्टोन बनकर रह गए हैं। उन्होंने मंडी की जनता से विश्वासघात किया है। भाजपा के कारण मिली विधायकी अब उन्हें त्यागनी ही होगी। भाजपा ने जिस तरह से संयम के साथ उनके मंत्र पद से त्यागपत्र का इंतजार किया वैसा ही इंतजार अब उनके भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और विधायक पद से त्यागपत्र का रहेगा। अगर अनिल शर्मा ने जल्द इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की तो पार्टी जल्द कोई निर्णय लेगी और उनके खिलाफ अनुशासानात्मक कार्रवाई करेगी।

गणेश दत्त ने कहा कि अनिल शर्मा ने इस्तीफे के बाद कहा कि मुख्यमंत्री को उन पर भरोसा नहीं है, तो वो यह बात क्यों नहीं समझते जब मुख्यमंत्री को मंत्री के तौर पर उन पर भरोसा नहीं है तो एक विधायक के तौर पर कैसे वो भरोसे के काबिल हैं।  उन्होंने कहा कि ऐसा संभव नहीं हो सकता कि भाजपा विधायक का बेटा कांग्रेस सासंद बनने का सपना देख रहा है। अनिल शर्मा अपने बेटे के लिए टिकट की वकालत करने मुख्यमंत्री के पास गए थे लेकिन जब उन्हें लगा कि यहां बात नहीं बनेगी तो आश्रय को कांग्रेस से टिकट दिला दिया।

दोनो नेताओं ने कहा कि इस बार फिर से प्रदेश से चारों की चारों सीटें भाजरपा की झोली में जाएगी और देश में एक बार ‌फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि अब दजेश व प्रदेश की जनता भी ऐसी पार्टी का साथ देगी जो परिवारवार से ज्यादा राष्ट्वाद को महत्व देता हो और जिसने राष्ट्र के लोगों को राष्ट्रीयता सिखाई है।

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