सदियों से चली आ रही पारंपरिक राजनीतिक विचारधारा बदलने का जिम्मा लिया है विशाल शर्मा ने

लिमबिक आइडोलोजिकल डायमेंशन्स नामक किताब के साथ-साथ लिख डाले तीन शोध पत्र

कमलेश

शिमला। राइजिंग हिमाचल और आदर्श हिमाचल एक साझा मंच पर आज अपने पाठकों से रूबरू करवाने जा रहे हैं शिमला के एक ऐसे युवा लेखक को जो आने वाले दिनों में अपने अनोखे आंदोलन के कारण चर्चा में रहेंगे। जी हां हम बात करे रहे हैं शिमला के रहने वाले विशाल शर्मा की जिन्होंने अपनी छोटी सी उम्र में शिमला जैसे छोटे पर विश्व विख्यात शहर से लिमबिक मूवमेंट की शुरूआत कर डाली। इतना ही नहीं लिमबिक डायमेंशन्स नाम से एक किताब भी लिख डाली है। यह किताब फिलहाल भारत में पाठकों को अमेजान और फ्लिपकार्ट पर आनलाइन उपलब्ध करवाई गई है। फिलहाल यह किताब भारत में ही उपलब्ध है लेकिन कुछ ही दिनों में यह विदेशों में भी उपलब्ध हो जाएगी।

किताब का शुरुआती रूझान काफी अच्छे हैं और इसे इंटरनेट पर युवाओं का खासा समर्थन भी मिल रहा है। अभी फिलहाल लिमबिक मूवमेंट की स्थापना में विशाल के साथ दो अन्य युवा भी साथ हैं। इनमें एक हिमाचल और एक जम्मू-कश्मीर से है।

क्या है लिमबिक मूवमेंट  

आइए विशाल से ही जानते हैं कि लिमबिक मूवमेंट है क्या और इनकी किताब में क्या है। विशाल बताते हैं कि इस कान्सेप्ट पर उन्हें लगभग 6 साल काम करते हुए हो गए हैं। विशाल शुरू से ही समाज में चली आ रही पारंपरिक पोलिटिकल डायमेंशन्स के बारे में सोचते थे और सोचते थे कि इससे अलग हटकर क्या हो सकता है। तब विशाल ने होल ब्रेन थ्योरी को बारिकी से पढ़ा और समझा।

विशाल के अनुसार अभी तक हर समाज में राजनीति की विचारधारा तीन केंद्र बिदुओं या कहें की सोच पर आधारित रहती है। इनमें लेफ्ट, राइट और सेंट्ररिस्ट विचारधारा शामिल थी। जबकि होल ब्रेन थ्योरी में यह 4 तरह विभाजित है।

विशाल को इस मूवमेंट के जरिए न तो राजनीति में आने का इरादा है और न वे किसी तरह के राजनीतिक दल की स्थापना के बारे में बात करते हैं। वे विशुद्ध रूप से अकादमिक तौर पर लोगों में इस सोच को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। उन्हें इस कन्सेप्ट की प्रेरणा फ्रेंच रेवोल्यूशन से मिली।

विशाल बताते हैं कि वैसे आज तक बहुत से लोगों ने इस कन्सेप्ट पर काम किया पर सभी लोग आज तक चली आ रही तीन तरह की राजनीतिक विचारधारा से आगे की सोच ही नहीं पाए।

लिखने का हुनर था पर प्रेरणा दी अध्यापक देवेंद्र शर्मा ने

विशाल के अनुसार लिखने का शौक और हुनर तो पहेल से ही था लेकिन से निखारा उनके एक अध्यापक देवेंद्र शर्मा ने। देवेंद्र शर्मा ने उन्हें न केवल लेखन की बारिकियां समझाई बल्कि उन्हें लेखन के लिए प्रेरित भी किया।

आज विशाल अभी तक 3 रिर्सच पेपर लिख चुके हैं। इसके अलावा लिमबिकक मूवमेंट पर विशाल के लेख कई जाने-माने अखबारों व न्यू पोर्टल्स में भी प्रकाशित हो चुके हैं। अभी तक विशाल 4 लेख लिख चुके हैं।

पिछले दिनों राजधानी शिमला के नाम पर बहस छिड़ी थी। उसके ऊपर भी विशाल एक शोध पत्र लिख चुके हैं साथ ही हिमाचल में गैर-हिमाचलियों को जमीन खरीदने बारे रोक संबंधी धारा 118 पर भी उन्होंने रिसर्च पेपर के साथ साथ  लेख भी लिखे हैं।

विशाल अभी  मूवमेंट से संबंधित 4 प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। विशाल के अनुसार लिमबिक मूवमेंट एक लिमबिक आइडोलोजिकल मूवमेंट है।

लिमबिक आइडोलजिकील डायमेंशन नामक जो किताब विशाल ने लिखी है उसमें लिमबिक मूवमेंट और उससे संबंधी जानकारी सांझा की गई है। लेकिन विशाल के अनुसार उनका कान्सेप्ट काफी विस्तृत है जबकि किताब में संक्षिप्त तौर पर इसकी जानकारी अभी उपलब्ध करवाई गई है। उनका किताब लिखने का उद्देश्य लोगों के साथ कनेक्ट कर पाने के लिए है। विशाल ने इसमें साधारण भाषा में अपनी बात रखी है ताकि पढ़ने वाले को आसानी से समझ आ सके।

विशाल के लिमबिक मूवमेंट या कान्सेप्ट के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर जा सकते हैं 

www.limbicmovement.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here