उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, लोक अभियोक्ताओं व अन्य हितधारकों को करेंगे जागरूक 

 

प्रियंका शर्मा

 

 

शिमला :-मुख्य सचिव बी.के. अग्रवाल ने वित्तीय धोखाधड़ी के बारे में जनमानस को जागरूक करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक तथा भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड के समन्वय से राज्य में और अधिक वित्तीय साक्षरता शिविरों के आयोजन पर बल दिया। वह आज यहां 9वीं राज्य स्तरीय समन्यव समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

           उन्होंने कहा कि वित्तीय साक्षरता पर राज्य के सभी तीन मण्डल स्तरों पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक तथा भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड के संकाय उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों, लोक अभियोक्ताओं तथा अन्य हितधारकों को जागरूक करेंगे।

          मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता शिविरों का आयोजन करने के लिए अग्रणी जिला प्रबन्धकों को सम्बन्धित उपायुक्तों से तालमेल स्थापित कर इसे जन मंच पूर्व गतिविधियों से सम्बद्ध करना चाहिए। हिमाचल प्रदेश में जन मंच जन शिकायतों के समाधान में सफल साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में हर महीने के पहले रविवार को आयोजित किए जाने वाले जन मंच के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक तथा भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड के अधिकारियों को वित्तीय साक्षरता के लिए 10 मिनट का समय दिया जा सकता है।

          बी.के. अग्रवाल ने कहा कि निकट भविष्य में सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों तथा उन व्यक्तियों जिनकी भूमि का फोरलेन के लिए अधिग्रहण किया जा रहा है, के लिए विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिए, क्योंकि ये लोग धोखाधड़ी के शिकार होने वाले सम्भावितों में से हैं। उन्होंने आर.बी.आई. तथा सेबी से हिमाचल लोक प्रशासन संस्थान तथा अन्य विभागों से उनके प्रशिक्षण मॉडयूल तथा कार्यशालाओं में वित्तीय साक्षरता को शामिल करने को कहा।

         उन्होंने विनियामकों को भ्रामक निवेशकों, बेईमान और असंगठित निकायों द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न प्रलोभनयुक्त योजनाओं को लेकर अवांछित कॉल के विरूद्ध आम जनमानस के हितों की रक्षा के लिए राज्य गेटवे, स्थानीय दूरदर्शन चेनल, रेडियो और समाचार पत्रों के माध्यम से इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचने के सन्देश जारी करने के निर्देश दिए।

        बैठक में अवगत करवाया गया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में जमा को स्वीकार करने के लिए कोई भी गैर बैंकिगं वित्तीय संस्था प्राधिकृत नहीं है। यह भी जानकारी दी गई कि आरबीआई ने हाल ही में आयोजित कुल्लू दशहरा में भाग लिया और जन जागरूकता के लिए सात दिनों तक स्टॉल स्थापित किया। बैठक में यह भी अवगत करवाया गया कि आरबीआई की सचेत वैबसाईट में देशभर में सस्ते ऋण, ऋण के बहाने प्रक्रिया शुल्क की मांग, जमा राशि पर ब्याज की उच्च दर की ऑफर तथा जाली लॉटरी योजनाओं के माध्यम से प्रलोभन जैसी लगभग 2000 शिकायतें प्राप्त हुई, जिनमें से 22 शिकायतें हिमाचल से सम्बन्धित थी, जिन्हें आगामी आवश्यक कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक को प्रेषित किया गया।

        आरबीआई की क्षेत्रीय निदेशक रचना दीक्षित ने कहा कि राज्य स्तरीय समन्वय समिति मंच का गठन सभी विनियामक और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को एक मंच पर लाना तथा राज्य में असंगठित संस्थाओं द्वारा अनाधिकृत तौर पर जमा  को स्वीकार करने से जुड़े मामलों में एक परामर्शी एवं समन्वित दृष्टिकोण अपनाना है, क्योंकि ये संस्थाएं विनियामक अंतराल का लाभ उठाकर आम आदमी को लुभाने में कामयाब होती हैं।

आरबीआई चण्डीगढ़ के क्षेत्रीय प्रबन्धक डॉ. देवी प्रसाद पाण्डा ने कार्यवाही का संचालन किया।

       अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल खाची, प्रधान सचिव यशवंत सिंह चोगल, निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा रोहित जम्वाल, सेबी के क्षेत्रीय निदेशक सुनील कदम, अतिरिक्त निदेशक (चिट फंड) सुषमा वत्स, एनएचबी के प्रबन्धक शरत भट्टाचार्य, राज्य सीआईडी के पुलिस अधीक्षक अर्जित सेन ठाकुर तथा राज्य सरकार के अन्य अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।

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